बड़ा मंगल: हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक

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लखनऊ में मनाया जाने वाला बड़ा मंगल हिन्दू मुस्लिम एकता का एक अनूठा पर्व है | लगभग 400 सालों से मनाये जा रहे बड़े मंगल में सभी सम्प्रदायों के लोग बढ़ चढ़ के हिस्सा लेते है | भगवान् हनुमान को समर्पित यह पर्व ज्येष्ठ (मई-जून) माह के हर मंगलवार को मनाया जाता है, जिसके उपलक्ष में शहर भर में भंडारों का आयोजन होता है |

वैसे तो लखनऊ में बहुत से हनुमान जी के मंदिर है पर बड़े मंगल की कहानी अलीगंज स्थित ‘हनुमान मंदिर’ से जुडी हुई है, और इसी कारण बड़े मंगल में यहाँ विशेष रूप से पूजा अर्चना होती है और भक्तों का तांता लगा रहता है |

बड़ा मंगल मानाने के पीछे कई कारण बताये जाते हैं, पर उनमें से एक कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है और इसी कहानी से हमें ये भी पता चलता है की भगवान् हनुमान के इस पर्व में लखनऊ के मुसलमान बढ़-चढ़ के हिस्सा क्यों लेते है |

कहा जाता है की नवाब सुजा-उद-दौलाह की पत्नी बेगम आलिया को सपना आया की किसी स्थान पर हनुमान जी की मूर्ति गढ़ी हुई है और उसे निकलवाकर वे उन मूर्तियों की स्थापना करवाएं, ऐसा करने से उन्हें पुत्र की प्राप्ति होगी |

जब आलिया बेगम का बेटा हुआ तो उन्होंने नवाब से कह कर कथित स्थान में खुदाई करवाई और वास्तव में वहां उन्हें भगवान् हनुमान की मूर्ति प्राप्त हुई | मूर्ति को हाथी में रखकर महावत बेगम के पास ला रहे थे परन्तु अलीगंज आकर हाथी एक स्थान पर रुक गया|

बहुत कोशिशों के बाद भी जब हाथी वहां से नहीं उठा तो यह फैसला किया गया की हनुमान जी के मंदिर का निर्माण उसी स्थान पर होगा | बेगम आलिया द्वारा मंदिर निर्माण तो करवाया ही गया साथ ही मंदिर की देख-रेख की जिम्मेदारी भी नवाबों ने ली | इसी मंदिर को हम आज ‘नया हनुमान मंदिर’ के नाम से जानते है |

मंदिर के निर्माण के बाद वहां मूर्ति स्थापित की गई तथा पूजा अर्चना करवाई गई, जिसके बाद एक भव्य भंडारे का आयोजन हुआ | उस रोज़ ज्येष्ठ मास का पहला मंगलवार था और तभी से ज्येष्ठ (मई-जून) के सभी मंगलवारों को भंडारा आयोजित करने की प्रथा चली आ रही है |

उस वक़्त जो भंडारा केवल मंदिर में हुआ करता था आज शहर के कोने कोने में आयोजित होता है | अलीगंज के हनुमान मंदिर के अलावा, हनुमान सेतु स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में भी  बड़ा मंगल बहुत जोर शोर से मनाया जाता है |

शहर के और मंदिरो में भी पूजा अर्चना और भव्य भंडारे आयोजित होते है | साथ ही लखनऊ का व्यापारी वर्ग फिर चाहे वो हिन्दू हों, मुस्लमान हो या सिख, ईसाई हों सभी लोग भंडारे का आयोजन करते है | बड़ा मंगल के भण्डारें में आलू पूरी और शरबत विशेष रूप से मिलता है| हालांकि आजकल भण्डारो में और भी अलग अलग व्यंजन वितरित किये जाते है |

एक मुस्लिम बेगम द्वारा निर्मित एक हिन्दू मंदिर, जिसका पर्व  लखनऊ के हर सम्प्रदाय के लोग मानते है, यह बात इस बात का सबूत है की अदब और तहज़ीब के इस शहर में धार्मिक सद्भवना सदियों से चली आ रही है|

सबसे खास बात यह है बड़ा मंगल एक अनोखा पर्व है जो की केवल लखनऊ में मनाया जाता है | इसी लिए हम इस पर्व को किसी धर्म से न जोड़ कर बल्कि लखनऊ की आवाम से जोड़कर देखते है जो की धार्मिक ध्रुवीकरण के माहौल में भी अनेकता में एकता की मिसाल कायम किये हुए है |

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